अध्यात्म में अहंकार
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अध्यात्म में अहंकार
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रश्मि जी : जी प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी वो क्या है कि अहंकार को फिर अलग से समझते हैं ठीक है जी एक बार फिर से अहंकार क्या चीज है जैसे ज्ञानी हो गया तो वो ज्ञान देने सड़ेगा है ना
प्रभु जी : और धनी है तो मेरा और शो करने लगेगा है कि नहीं उसको तो अहंकार बोलते हैं वो अहंकार संसारी अहंकार है
रश्मि जी : अच्छा जी वो अहंकार जो हम अध्यात्म में अहंकार जो कह रहे हैं वो वो अहंकार नहीं है। अच्छा जी। तो अध्यात्म में जो अहंकार कहते हैं वो अहंकार है क्या? तब बताइए तो क्या है? अध्यात्म का अहंकार यही है कि मैं मतलब अध्यात्म का अहंकार तो ये भी कह सकते हैं कि मैं अपने आप को वो यंत्र मतलब शरीर नहीं अध्यात्म तो शरीर फील करेगा नहीं। प्रभु जी आप बताइए।
प्रभु जी : नहीं अहंकार तो अध्यात्म में आने के बाद अहंकार तो आप हो अगर आप सोच रहे हो ना वो भी अहंकार है आप साक्षी स्वरूप आत्मा हो तब तक ना पता चले तब तक तो खुद लगेगा ना कहीं ना कहीं जाके भलाई मुक्त शब्दों से मैं नहीं हूं मैं रोबोट हूं ऊर्जा आ रही है ऊर्जा करवा रही है भलाई आप कह करे जी जी जी तब भी कहीं ना कहीं जाके तो लगेगा ना रश्मि तो है भैया जी जी जी है ना अब तब तक वो अहंकार है अब ऐसा नहीं कि उसकी आदत की वजह से उसको अहंकार ज्यादा हो गया अभी अध्यात्म में लोग क्या करते हैं आदत सुधारने लगते हैं अहंकार करने के लिए गुस्सा आया तो गुस्सा कम करके बैठो ये हुआ तो ये करो उससे
रश्मि जी : अहंकार कम होने का कोई व्यवस्था ही नहीं है ओ अच्छा वो तो जीवन में जीने का अच्छा जरिया है बस
प्रभु जी : अच्छा वो जीवन में कैसे अच्छे जिए कहां पे कैसे करें उसके लिए है ठीक है वो लेकिन जो अध्यात्म के लिए जो चीज है उसके लिए वो नहीं है अहंकार तो जब तक आपको लगे आप हो तब तक अहंकार है समझे कि नहीं जब तक कुछ भी आप बोले ना बोले आप अच्छा हो ना अच्छा हो ज्ञानी हो महाज्ञानी हो ब्रह्म ज्ञानी हो तब तक आपको लगे आप हो तो अहंकार है वो आप ही अहंकार हो और आज की सत्संग में वही अहंकार के रूप में जब तक आपको ना लगे तब तक आपको अंतिम अहंकार पता ना चले। ब्रह्मचारी में भी माया भी विष्णु आती है। वही तो बताया उस अध्याय में है ना?
रश्मि जी : जी जी एक माया आती है। एक ब्रह्मा आती है। ओरिजिनल विष्णु तो तभी आएगा।
प्रभु जी : अब माया भी कितने माया कितने ब्रह्मांड के हिसाब से काम करना उस चीज का बहुत कैलकुलेशन है। अब ये बता के नहीं आएगी समझ में। तो माया कब तक नहीं छूटेगी? जब तक अहंकार नहीं छूटेगा। अब अहंकार कब छूटा दूसरे को पूछने का जरूरत ही नहीं पड़ेगा। पड़ेगा रश्मि जी।
रश्मि जी : हां नहीं। मतलब जैसे मैं ये तो मुझे समझ में आ गया। आपने मतलब जैसे कि जो कुछ है हम जैसे बोलते हैं या जो भी कुछ है वो एक जीवन शैली एक अलग चीज है। आदत सुधारना ये कर लेना और आदत सुधार के बैठ गए कम मतलब जो भी ये एक जीवन शैली हो गई। लेकिन वास्तविक अहंकार जो आप कह रहे हैं कि मतलब वो भी थर्ड स्टेज वाला है कि मतलब सेकंड स्टेज वाला तो यही हो गया कि ब्रह्म
प्रभु जी : अध्यात्म का अहंकार एक ही है रश्मि जी आप हो आपको लगता है आप अहंकारी है अच्छा आपको लगता है आपका अहंकार गिर गया
रश्मि जी : अच्छा होनापन मतलब जब तक मैं अपने आप को फील कर रही हूं यही ना अहंकार गिरने की बात भी अभी आप जैसे फील
प्रभु जी : कर रही हो वैसे फील करोगी ना मैं मैं भी तो वैसे फील करता हूं ना। जी हां जैसे मुझे पहले माधव लगता था वह भी नहीं लगता है तो क्या उससे कमी हो गया जैसा लगता है ज्यादा हो गया जैसा लगता है नहीं कमी ज्यादा भी कुछ भी नहीं बस समझ आ गया
रश्मि जी : अच्छा मतलब जब तक हम अपने आप को फील कर पा रहे हैं मतलब हर तरीके से हां
प्रभु जी : रश्मि को लगी रश्मि है तो अहंकार है रश्मि नहीं है अब अब अहंकार नहीं होगा तो आपको ये समझ में आ जाएगा ये बॉडी पंच तत्व से बनाया हुआ कीड़े मकोड़े की तरह है। अब इस बॉडी के अमीर नसड़ियों की फंक्शनिंग है। उस फंक्शनिंग के हिसाब से बॉडी चल रहा है और इस बॉडी को चलाने के लिए जो ब्रह्मा का चेतन है वो अलग से चला रहा है। उस चेतन में माया है और माया सारे चीज को हम साक्षी स्वरूप देख रहे हैं। तब तब अहंकार गिरा अब है नहीं वो साक्षी स्वरूप है तो क्या वो मूढ़ा की तरह पढ़ा
रश्मि जी : रहा है नहीं वो आप नहीं समझ पाओगे वही तो है चमत्कार फिर भी प्रभु जी बताइए मतलब वो आप ऐसे कह रहे हैं कि सपोज क्योंकि जैसे जब वो जो स्टेज है वो तो हमारे हम तो इमेजिन भी नहीं कर सकते उस स्टेज की फिर भी मैं एज अ क्वेश्चन पूछ रही हूं कि मतलब जब वो स्टेज है जैसे सपोज आपने अभी बोला ना जैसे मूढ़ा की तरह पड़ा रहे मतलब उसे अपने शरीर का इतना भी भान नहीं है अब जैसे उनका
प्रभु जी : एग्जांपल है परमहंस जी का उन्हें अपने शरीर को आपको जितना है उतना ही होगा। कम कुछ नहीं होने वाला। पूर्ण मद पूर्ण मुदते बोलता है ना इतना पूर्ण है कि पूरा उसको छेद पर काटो जैसे करो वो तब भी पूर्ण है। कहीं की इलाओ तब भी पूर्ण है। तो फिर क्या उस दशा प्राप्त करने के बाद आपकी दशा कम होगी? आपकी जो दशा थी वो घट जाएगी। नहीं क्यों घटेगी? तो मु की तरह बढ़ा रहा उसको याद नहीं वो चेतन नहीं वो तो वो बीमार की अवस्था में थे। मतलब वो साधन की अवस्था में थी। स्टेज है वो हम भी बोए थे वैसे अवस्था में वो थोड़ा सा स्टेज है अब उस स्टेज को कैसे पार करें और
रश्मि जी : जल्दी से पार करें आगे जाए ये तो प्रभु जी आज तो ये वाला जो अहंकार का कुछ नया ही रूप देखा यही है असली रूप तो दूसरा है ही नहीं हम तो अहंकार को कुछ और ही समझ रहे थे हां वो संसारिक अहंकार है हां हां समझ में आया।
प्रभु जी : अब संसार में मौन का अर्थ क्या है? बकबक करके ना बैठना तब बस जी बैठो। वो मौन हो गया संसार में। अब अध्यात में वो मौन मानेगा। नहीं आपके अंदर की कसर पसर चुप है अम होने
रश्मि जी : तो यह तो प्रभु जी ये तो बहुत टिपिकल चीज है ये तो बहुत मतलब ये ऐसी ये तो इतनी आसान स्टेज नहीं है वो तो मेरे ख्याल से
प्रभु जी : यही अंतिम स्टेज होती होगी तभी परमात्मा वही तो है गिर गया तो अब आप हो गए ना अब गिर गया तो अब आए नहीं अभी स्टेज उससे आगे क्या ये तो हम सब लोग सोच रहे हैं हम लोग को धारणा इतना बनाया गया है कि हम इतनी नॉर्मल बात नहीं समझ पा रहे समझने के बाद इतना नॉर्मल लगेगा नॉर्मल है सारे अब भी समझ जान बहुत जानकार हो गए ना अच्छा
रश्मि जी : प्रभु जी फिर ये वो जो अहंकार गिर गया वो जो अध्यात्म वाला आप बता रहे हो डीप अध्यात्म वाला फिर वो अहंकार गिर गया फिर संसार कैसा दिखाई देता है उस चश्मे से आपको दिखाई दे रहा है वैसे ही दिखाई देगा ना प्रभु जी हमें तो सब दिखाई दे रहा है हम
प्रभु जी : तो फील कर रहे हैं हम है हम लेकिन वो ये होता है पहले संसारी संसार को देखता है तो संसार जो देखता है वो अपना ही विचार देखता है उसको है ना वो सोचता है उस जैसे जैसे वो सोचता है वैसे वैसे होता है फलाना आगे का उसको चोर लगे तो उसको ऐसा ऐसा सीन दिखा देता है कि प्रकृति भला उसको तो चोर ही है जैसा लगेगा अब उसको अच्छा आदमी है जैसा उसकी में आ गया तो प्रकृति उसको सब अच्छा अच्छा करके अच्छा आदमी है दिखा देगा। है ना? ये सारे चीज नियम समझ में आ जाएगा और आगे का बंदा ऐसी मन बुद्धि में क्या चल रहा है वह सारे चीज इस समझ की बात है।
रश्मि जी : तो प्रभु जी तो प्रभु जी मेरा एक ऑपरेशन फिर और करिए। आपने तो एक ही किया। आपने तो 3 डी वाला कर दिया मेरा। 5 डी वाला घर सबसे बड़ा ऑपरेशन किया है रश्मि जी अगर आप
प्रभु जी : समझ पाए तो क्योंकि खुद को पूछो ना भाई मैं कैसे नहीं हूं एक जरिया मिली है ना
रश्मि जी : जी अब तक तो रश्मि है तो था ना जीव बोध है आप हो आपको पता है बॉडी से अलग हो वो भी पता है आपको हां जी वो पकड़ने आता है वो
प्रभु जी : हां लेकिन आप तो हो ना जो भी हो जिधर भी हो कैसे भी हो बड़ा समझ में आए ना आए आपको लगता है ना आप हो
रश्मि जी : हां प्रभु जी मुझे कभी लगता है मैं हूं और कभी लगता है मैं नहीं हूं तो फिर मैं जल्ला जाती हूं खुद से फिर मैं सोचती हूं
प्रभु जी : प्रष्ट जानकार होना जो कभी-कभी लगता है ना नहीं हूं हां उसका स्पष्ट अनुभव हो जाना उसका स्पष्ट ज्ञान घटित हो जाएगा हां वो स्पष्ट तब गिरा वो आता है अहंकार अब वो ध्यान से ही गिरता है अहंकार भी है ना रश्मि जी ऐसा जीवन चर्या के साथ तो है ही है लेकिन अहंकार ध्यान में गिरता है ठीक है ध्यान में जब अहंकार गिरता है तो क्या लगता है कि आप लेटी पड़ी हो लेकिन आप बॉडी छोड़ के जा रही हो अब बॉडी छोड़ के आप छोड़ छूटा छटा अब आप गई चली गई अब वो उड़ के तो चला गया वो गया लेकिन आप जैसे थी उससे फिर वो वो गया अभी उतना ही था जैसे अभी आप हो जैसे आप मर गई है ना अब वो गया और फिर आप जैसे हो वैसे फिर आप तो बड़ी में हो फिर ऐसे वो इस तरह अहंकार गिरता हुआ अनुभव आएगा एक बार नहीं गिरता गिरता ही जाता है बार बार गिरता है क्योंकि हमको जितना धारणा है वो धारणा के ऊपर अहंकार गिरना है बस असली बात वही है धारणा गिरना है वो धारणा ने बनाकर रखा है ना जो रश्मि को भी तो धारणा है नाम दिया गया है उसका बेटी वो करती है ये करती है ये सारे धारणा अब ये सारे चीज का अहंकार है ना अब आस्तेआहिस्ते आस्ते गिरता रहता है और अहंकार गिरना भी समाधि के बाद गिरता है आप सोचो तो या समाधि भी हो गया काम बन गया बोलते
रश्मि जी : तो प्रभु जी वैसी वाली समाधि है कि मतलब एक तो हमने तो समाधि ज्यादातर ऐसी सुनी है ना कि वो समाधिष्ट हो गया मतलब समाधि का अर्थ यही है रश्म जी पहले समाधि
प्रभु जी : भी समझो समाधि का अर्थ क्या है जब आपको ध्यान में जाके घटना घटित हो जाएगा जहां पे आप बड़ी नहीं ऊर्जामय हो। अब आपको समझ में आया मैं बड़ी नहीं हूं। बॉडी मेरे लिए अभी ये संसार का है। इसके साथ पूरा ऊर्जा है। ऊर्जा चला रहा है। अब इसको समझना नहीं आएगा। अब उसको धारणा ज्ञान कहां किधर क्या सुना है उसी के ऊपर वो जस्टिफाई करके अपना ज्ञान को कन्वर्ट करेगा। उधर उधर फस जाएगा। वो समाधि के बाद की अवस्था समाधि घटने की और जब ये समाधि घटने के बाद उसको अच्छा रास्ता मिला वो सही ट्रैक में गया तो उसका अहंकार गिरता गिरता गिरता गिरता जाएगा जो जैसे मैंने बताया खुद को जाना खुद अभी खुद को जैसे महसूस करते हैं वो उड़ गड़ जाएगा गायब हो जाएगा लेकिन आप जैसे हो वैसे रहेगा वो वो अनुभव है अहंकार का