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5D की तरंग !! 5D consciousness vibration

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5D की तरंग !! 5D consciousness vibration

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प्रभु जी : जी ये तरंग पकड़ने के लिए सबसे एक वो होना ही पड़ता है। जैसे क्या होता है कि आपके संसार में आप तकलीफ के अंदर हो। ठीक है? आपको पूरा तकलीफ घेर के रखा है। लेकिन आप खुद को देख रहे हो तो आप तो खुशी उमंग है अंदर। बाहर फिर तकलीफ है। वो है वो है झमेला है। भरभर है बाहर। लेकिन आप खुद अंदर एक उमंग के साथ होते हैं। तब ये तरंग जब पकड़ेगा तब वो और पकड़ेगा। आपको समझ आ रहा है ये बात? हां आया आएगा ध्यान में वो बाहर कितना भी कुछ भी चल रहा है बाहर कितना भी गड़बड़ हो रहा है लेकिन ये भीतर का धैर्य धैर्य के साथ वो तरंग उमंग आनंद बना रहता है और इवन दो मैंने नोटिस किया कि वो बाहर का इसका वो जो चल रहा है ना कुछ बाहर और मैं उस तरंग के साथ उमंग के साथ आनंद के साथ हूं ना तो बाहर की चीज का सोलशन भी मिलता है और आज मैंने वो वो चीज नोटिस किया और दो बार मैंने वो सोलशन दिया और मेरे को लगा भैया क्या परफेक्ट था ऐसा वाला था तो वो सिंपल ही चीज लेकिन मैं मन बुद्धि से करने चाहता तो होता नहीं था और मैं इवन दो इतना मतलब वो गड़बड़ वाली थी बट मैं बोला भैया ऐसा नहीं ऐसा कर दो तो ऐसा नहीं ऐसा कर दो तो मैं भीतर से था शांतता धैर्य था उमंग आनंद थे सर और वो डिसीजन लिया तो मुझे लगा हां ये तो परफेक्ट है अभी जी और सुनो और इसको और डीप में सुनो इस बात को पकड़ो ना जो मैं कहना चाह रहा हूं ठीक है ये उमंग तरंग तो आपको 3 डी में भी आ जाता है तरंग है ना पूरे तरंग तो आ जाते है 3 डी में तरंग पकड़ पाते हैं लेकिन 5 डी में रहकर तरंग पकड़ने के लिए वो एक बार वो अनुभव पकड़ेगा तभी तो वो अनुभव है कि नहीं जैसे क्या होगा कि आप आपका लड़ाई चल रहा है लेकिन आप खुशी हो कोई भला खुशी हो सकता है बाहर लड़ाई आपको अंदर से लगेगा खुशी गदगद मतलब खेल रहे हो लड़ाई नहीं है आप खेल रहे हैं और आपको पता है सारा चीज एक उमंगा साथ आता है वो उस चीज को पकड़ना है बाहर तकलीफें अंदर उमंग है अब वो एक बार पकड़ के आया फिर अब वो साध ना सकेगा जी लड़ाई लड़ाई जैसी नहीं लगती खुशी लगता है या

शिवांगी : प्रभु जी प्रभु जी

प्रभु जी : हां शुभांगी करो तो कंटिन्यू करो जब आप कुछ इधर उधर बोल रही थी इसलिए मैंने बीच में टोका

शिवांगी : जी जी भैया जी तो उस एक दिन क्या हुआ ना मैं ऐसे ही मार्केट में जा रही थी तो ऐसे भोले बाबा के सॉन्ग्स लगा दिए और उसे सुनते-सुनते आकाश को देखतेदेखते जा रही थी तो उस समय यह हुआ ना कि अरे ये सॉन्ग भी तो भोले बाबा ने क्या हमें बताया है कि हर चीज में मतलब इनवॉल्व नहीं होना है बस उसे देखना है तो उस सॉन्ग्स के साथ-साथ मैं बहते जा रही थी बहते जा रही थी बट फिर ध्यान में आया नहीं बस वो तो हो रहा है क्योंकि कुछ भी घटना अगर हो रही है तो बस होने देना है उसको फिर उसके उसके बाद भी जो मन के भीतर क्योंकि अगर मैं वो सॉन्ग के साथ भी बह रही हूं तभी तो वो एक अलग हो रहा है ना क्योंकि मेरी मन बुद्धि चल रही है वहां पर कि हां अरे भोले बाबा ये ऐसा वो वैसा क्योंकि उस लिरिक्स के साथ वो जो वर्डिंग्स है सॉन्ग्स के उसके साथ मैं बहते जा रही थी। फिर मैंने ना खुद को एकदम भीतर से शांत किया। तो शांत करने के बाद ना एक खुशी वाली जो रहती है मतलब वो खुशी वाली तो थी बट उसके साथ-साथ वो मतलब डर वाली भी थी फिर मैं वही सोच रही हूं क्या अरे यहां पर डरने का तो कुछ है नहीं मैं तो अपनी मस्ती से मार्केट में हूं सब्जी ले रही हूं खानेपीने की चीजें ले रही हूं जो चाहिए वो कर रही हूं यहां पर डर तो है नहीं बट डर क्यों आ रहा है तो फिर मतलब वहां पर था मुझे वहां पर महसूस हुआ कि हां खुशी के साथ-साथ जो डर वाली बताते हैं ना भोले बाबा राजेश दाई तो ये होगा इस तरीके से तब मैंने जाना फिर थोड़े टाइम के बाद मतलब ज्यादा टाइम तो नहीं था थोड़ा ही टाइम था लेकिन उसके बाद इतनी घबराहट मतलब मुझे तो लिटरली पसीना चक्कर वगैरह ऐसे भी फील होने लग रहा था तो वो होता है मतलब हम अगर बहुत ज्यादा अगर हम मन बुद्धि में नहीं रहे ना तभी हम उस तरंग को पकड़ पाएंगे जान पाएंगे। तो अभी डे टू डे लाइफ में भी अभी एक्चुअली जैसे भोले बाबा बोलते हैं कि ब्रह्मचर्य सदो वैसे ही मैंने ऐसे एक बार ओशो का यह सुना था तो उन्होंने भी क्या बोला कि भीतर से तुम शांत रहो। जैसे तुम भीतर से शांत होते रहोगे वैसे ही बाहर की चीजें ना ऑटोमेटिकली हो जाएगी। तो दो दिन पहले तो मैं भी खुद मतलब वो घर पर यही मम्मी नहीं मान रही है। दीदी नहीं मान रही है। ये ऐसे कर रहे हैं। मां को ऐसे बोल रहे हैं टिमबर गीता मां को इस तरीके से चल रहा था। मैं पूरा थर्ड डायमेंशन में चली गई थी। लेकिन फिर पता नहीं मतलब मैंने सोचा कि अरे हां ये तो होने वाली चीजें ठीक है ना? मतलब होगा ही ना यह। इसका तो कुछ यह नहीं है। यह तो मेरे हाथ में है नहीं। ऐसा कुछ तो भी हुआ और फिर जाना कि अगर मैंने पकड़ा तो है। अगर मैंने नहीं पकड़ा छोड़ दिया तो कुछ भी नहीं है। ये तो सारा मेरा मन बुद्धि का ही खेल है ना। लेकिन यहीं पे तो मन बुद्धि छोड़नी है ना। यही तो सिखा रहे हैं ना। फिर छोड़ दिया। तो छोड़ जब मैंने ये छोड़ा ना उसी के बाद मैं इस तरंगों को पकड़ पाई। और अभी मतलब कुछ टेंशन भी नहीं आ रहा है। हां पता है चल रही है परीक्षा चल। मतलब ठीक है जो भी हो रहा है बस हो रहा है बट मैं अपने मस्ती में मस्त हूं इस तरीके से अभी हो रहा है लेकिन थोड़ा सा भी मन बुद्धि में अगर थॉट आते हैं ना तो हम उस तरंग को नहीं पकड़ पाते हैं तो मैं अभी फिलहाल यही प्रयत्न कर रही हूं कि भीतर से मैं जो मन के अंदर जो चल पचल चल रही है उसे बस शांत करूं वो शांत हो जाएगी तो बाकी सारी चीजें बस हो ही जाएगी वो तो ब्रह्मांड है ना वो तो कर ही लेगा इस तरीके से तो फिलहाल जब भी थॉट्स आ रहे हैं डमरू वाले टिमबर गीता वाह वाह वाह बोलकर स्टॉप बोलकर उसी समय शांत होने का प्रयास कर रही हूं मैं तो यही है अगर मन बुद्धि नहीं है तो उस तरंग को हम पकड़ पाएंगे वरना नहीं और वो दोनों साथ-साथ चलती है तो फिर उसके बाद आज वही दोपहर में भाई राजेश भैया से बात हुई तो वो वही बोल रहे थे ये चलता ही रहता है सिर्फ हमें हम अगर सूक्ष्म होंगे तो ही पकड़ पाएंगे फिर उसके बाद हम हमारे ऊपर है। हम उमंग की तरफ लेकर जा रहे उस तरंगों को कि दुख की तरफ मतलब भय वाला जो रहता है उस तरफ लेकर जा रहे हैं। तो वही है बस सूक्ष्म होना है। मन बुद्धि से शांत हो जाएंगे तब हम उस तरंग को जान पाएंगे पकड़ पाएंगे।

प्रभु जी : और शिवांगी एक बात ख्याल करना। ठीक है। भीतर से शांत का भी आपको ये समझ आ गया है। भीतर के शांत का अर्थ है हमारे अंदर जो विचार चलती है कुछ ना कुछ बातें चलती है। उसको स्टॉप करना है भीतर से शांत है ना

शिवांगी : जी।

प्रभु जी : वो भीतर से शांत होने का अर्थ है आप पहुंच गए मौन में।

शिवांगी : जी

प्रभु जी : और जो आप सूक्ष्म होने के बाद तरंग पकड़ते हैं बोलते हैं ना वही मौन अवस्था को सूक्ष्म अवस्था कहते हैं। जी भोले बाबा समझ में आया?

शिवांगी : हां हां हां वो होता है जैसे मैं बात का अर्थ एक ही है। हां हां

प्रभु जी : अब उस मौन में जो ऊर्जा आता है वो ब्रह्म ऊर्जा होता है। जो अब वो भीतर से शांत नहीं है। अब उसमें ऊर्जा भला ऊर्जा भी आया ब्रह्म ऊर्जा नहीं वो माया भी विष्णु का ऊर्जा है।

शिवांगी : जी

प्रभु जी : यही है मेन बात भीतर से शांत धैर्य वाला है ना भैया धैर्य में आएंगे शांत हो जाएगा तो वो ऊर्जा ब्रह्म की ऊर्जा

शिवांगी : जी

प्रभु जी : धैर्य भी वही है

शिवांगी : जी

प्रभु जी : धैर्य का अनुभव मतलब आपको तो अब कुछ भी अंदर बातें नहीं चल रहा है बस जो हो रहा है हो रहा है देख रहे हैं साक्षी स्वरूप मौन में

शिवांगी : जी जी

प्रभु जी : उस अवस्था को धैर्य हां एक एंगल से उसका दिया गया नाम है लेकिन है तो सबका मौन ही है

शिवांगी : समझो तो धैर्य भी मौन कैसे है समझ में आया हां हां है ना धैर्य भी मौन है और जो जी

प्रभु जी : शिवांगी ने अच्छा बोला था ना अंदर को अंदर शांत रहो अंदर शांत होना भी मौन है और आईडी की अवस्था भी मौन में ऊर्जा के साथ है। ये तो आप हर दफा मौन में बस ऊर्जा आ रही है जा रही है।

शिवांगी : जिधर से समझाया भी वही