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मैं का विराट स्वरूप - The grand universal form of the self

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मैं का विराट स्वरूप - The grand universal form of the self

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प्रभु जी : समझना तो क्या है कि जैसे विराट स्वरूप तो एक ही है। सारा ब्रह्मांड का बड़ा स्वरूप एक ही है। ब्रह्म स्वरूप वही एक स्वरूप के अंदर ये सारा पृथ्वी, चंद्रमा, वायु, आकाश सब बना हुआ है।

सुधा माता जी : हां जी।

प्रभु जी : अब इसी में पानी है। उसी में हम लोग जी रहे हैं। उसी में कीट, पतंगर, वनस्पति सब लोग जी रहे हैं।

सुधा माता जी : हम

प्रभु जी : अरे चीज का जीना वो ब्रह्मांड एक का जीना है।

सुधा माता जी : अच्छा

प्रभु जी : अब और इसको और आसानी में हमारी बॉडी को देख लो। जैसे आपकी बॉडी को कौन लीड करता है? आप एक करते हो ना?

सुधा माता जी : हां जी

प्रभु जी : जैसे आपकी बॉडी जो बॉडी है वो बॉडी आप एक ही जैसे हाथ हिलाना पड़ा तो आप ही हिलाती हो

सुधा माता जी : हां जी

प्रभु जी : कुछ भी करना पड़ा तो उसको इशारा कौन देता मतलब आप ही करती हो वो आपको एक ही अनुभव है ना वो उसमें दो तो नहीं है

सुधा माता जी : नहीं नहीं

प्रभु जी : अब वो एक समझो आपको हाथ हिलाने का इशारा किस-किस ने दिया जैसे मानो की आपकी अंदर ब्लड चल रही है पानी है जैसे ब्रह्मांड शरीर का पानी है ना

सुधा माता जी : हां जी

प्रभु जी : और आपकी हड्डियां जो है इसको आप समझो पत्थर

सुधा माता जी : हां हां हां हां

प्रभु जी : है ना

सुधा माता जी : हां जी

प्रभु जी : और ये मांस मसीहा समझो आपकी ये पृथ्वी

सुधा माता जी : हां मिट्टी वगैरह हां जी

प्रभु जी : हां बाहर से जो भी खाते हो वो सारी चीज नवग्रह की तरह सोचो जैसे खा सूर्य खाया मतलब आपने अग्नि पैदा होता है ना खाना से तो आप सूर्य आ गया ना खाना समझ रहे खाना खाना खाया तो आपको ऊर्जा आया है ना अब सारे अंग को आप जीव जानवर सोचो कोई हाथ एक जीव है एक प्रकार की जानवर है वो एक प्रकार की जानवर है ना जंगल हमारी कपाल बाल जितने भी है इसको जंगल गधा समझो है ना इस तरह देखो तो इतनी ये जंगल ये हमारी एक बॉडी में भी पूरा ब्रह्मांड के हर चीज को तोलने की चीज है ना

सुधा माता जी : हां सब कुछ है मतलब हां जी

प्रभु जी : अब उसको एक ही चला रहा है ना।

सुधा माता जी : हां।

प्रभु जी : अब वहां पर जब ब्लड भी तो अपना दुनिया में जी रहा है।

सुधा माता जी : हां जी।

प्रभु जी : अब ब्लड का दुनिया अलग है।

सुधा माता जी : हम

प्रभु जी : वो मांसपेशी का दुनिया अलग है। फिर वहां पे और हड्डियां की दुनिया अलग है।

सुधा माता जी : हां हां

प्रभु जी : अलग-अलग आई में जीते हैं ना उन को अलग-अलग तरीका से अनुभव करते हैं ना और अलग-अलग आय में उन लोग अलग-अलग अनुभव करने के बाद भी अंतिम में आप तो एक ही अनुभव करोगे ना

सुधा माता जी : हां जी हां हां क्योंकि सब मिला हुआ है

प्रभु जी : तो कुछ समझ में आया विराट स्वरूप एक कैसा अनुभव करता होगा

सुधा माता जी : हां हां पूरा मतलब कितना विराट हो गया कितना मतलब पूरे सारे कितने ब्रह्मांड मिल गए अंदर शरीर के अंदर प्रभु जी तो वो कितना विराट हो

प्रभु जी : जंगल भी मिल गया, पत्थर भी मिल गए, पहाड़ भी मिल गए, मिट्टी भी मिल गई, पानी भी मिल गया। अब अब आते हैं वहीं पे जो आप लोग की अनुभव के साथ वो अनुभव इसलिए थी देखो तो अभी कभी आप कोशिका में कोशिका के अनुभव में आप जाते हो, कभी ब्लड के अनुभव में जाते हो, कभी हड्डिया के अनुभव में जाते हो, कभी मांसपेशिया के अनुभव में जाते हो, कभी धारणा के अनुभव में जाते हो, कभी मंद बुद्धि के अनुभव में जाते हो। बहुत सारे अलग-अलग अनुभव में अगर एक अकेले अनुभव को लिया ना तब आपको वो कॉनशस पकड़ नहीं पाता हुआ क्या है

सुधा माता जी : अच्छा

प्रभु जी : अभी तो जो होश में हो रहा है तो आप वो अनुभव नहीं पकड़े हो बस एक पकड़े हो

सुधा माता जी : हां हां हां

प्रभु जी : उस अनेक में जब अनेक में से कोई एक पकड़ोगे तो आप उसको समझ नहीं पाओगे बात समझ में आया

सुधा माता जी : जी

प्रभु जी : है ना आप पूरा ब्लड मांसपेशिया पूरा शरीर स्वरूप आप हो तो आप पकड़ पा रहे हो सर ऐसा कर रहा है करके अगर आप ये शरीर ना होकर आप गई ब्लड की दुनिया में आप बन गई ब्लड ओनली ब्लड अब ब्लड के आया है वहां पे भी ऐसा ही है तो फिर उस टाइप की आपको वो अनुभव पता नहीं चलता है इसलिए ये सारी चीज आयामिक चेंजेस होते हैं तो ऐसे सारे चीज घटनाएं भी घटती है अनुभव भी आती है और ऐसे तरीके से उथलपुथल डिस्ट सपना क्या है ये कैसे है ये किधर का क्या है ये सारे चीज इस तरीके से होता है

सुधा माता जी : हां जी

प्रभु जी : समझ में आया

सुधा माता जी : जी जी आया समझ में